गड्ढों में गुम विकास आगरा–जलेसर मार्ग पर जनता का फूटा गुस्सा रोज गुजरते नेता फिर भी खामोशी कायम
लगातार सड़क की तस्वीरें और वीडियो साझा कर रहे हैं और जिम्मेदारों से जवाब मांग रहे हैं

आगरा–जलेसर मार्ग की हालत इन दिनों इतनी बदहाल हो चुकी है कि अब यह सड़क कम और मुसीबत का रास्ता ज्यादा नजर आने लगी है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, टूटी हुई सड़क और धूल-कीचड़ से भरे हालात हर रोज हजारों लोगों की परेशानी का कारण बन रहे हैं। वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं, जबकि आए दिन छोटे-बड़े हादसे इस लापरवाही की सच्चाई बयां कर रहे हैं। बरसात के दिनों में तो यह मार्ग पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो जाता है और हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। कई बार शिकायतें की गईं, अधिकारियों तक बात पहुंचाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला और जमीन पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों का सब्र टूटने लगा है और गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है।
सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि बड़े-बड़े मंचों से विकास के दावे और वादे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन वे वादे मंच से उतरकर कभी जमीन तक नहीं पहुंचते। चुनावी भाषणों में सड़क, विकास और सुविधा की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन हकीकत में यह मार्ग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जनता अब खुलकर कह रही है कि यह सिर्फ भाषणों और दिखावे की राजनीति बनकर रह गई है।
हैरानी की बात यह भी है कि इसी मार्ग से रोजाना जनप्रतिनिधियों और नेताओं का आना-जाना लगा रहता है। वे खुद इन गड्ढों से गुजरते हैं, इस बदहाली को अपनी आंखों से देखते हैं, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे लोगों के मन में यह सवाल और भी गहरा हो गया है कि जब सब कुछ साफ नजर आ रहा है, तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
लोगों का यह भी कहना है कि कुछ लोग सिर्फ नेताओं की हां में हां मिलाने और उनकी छवि चमकाने में लगे रहते हैं, लेकिन क्षेत्र की असल समस्याओं पर चुप्पी साध लेते हैं। अब जनता ऐसे रवैये को भी स्वीकार करने के मूड में नहीं है और खुलकर सवाल उठा रही है।
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से उभर रहा है। लोग लगातार सड़क की तस्वीरें और वीडियो साझा कर रहे हैं और जिम्मेदारों से जवाब मांग रहे हैं

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साफ तौर पर चेतावनी दी जा रही है कि अगर जल्द ही सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो विरोध और तेज होगा और जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि कब तक इस स्थिति पर चुप्पी साधे रहते हैं और कब इस बदहाल सड़क को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल जनता ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा, उन्हें जमीन पर काम चाहिए।




