टॉप न्यूज़यूपीलोकल न्यूज़

बरहन के आंवलखेड़ा स्थित सूरज फार्म हाउस में गुरुवार को आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह में सादगी,

सामूहिक विवाह जैसे आयोजन न केवल सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हैं,

आगरा जनपद के आंवलखेड़ा से एक बेहद सराहनीय और सामाजिक संदेश देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां जनहित जागृति सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित 47वें सर्वधर्म सामूहिक विवाह समारोह में 7 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधकर एक नए जीवन की शुरुआत की।

बरहन के आंवलखेड़ा स्थित सूरज फार्म हाउस में गुरुवार को आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह में सादगी, संस्कार और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत आगरा-जलेसर रोड स्थित गायत्री शक्तिपीठ मंदिर से हुई, जहां से दूल्हों को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ घोड़ों पर सवार कर बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच विवाह स्थल तक लाया गया।

विवाह स्थल पर पहुंचने पर महिलाओं द्वारा मंगल गीत गाकर बारात की अगवानी की गई। इसके पश्चात आचार्य पंडित हरिओम शास्त्री जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की सभी रस्में संपन्न कराईं।

इस दौरान सभी नवयुगलों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया और अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हुए सुख-दुख में साथ रहने की कसमें खाईं।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खंदौली ब्लॉक प्रमुख आशीष शर्मा एवं विशिष्ट अतिथि जिला अध्यक्ष कुशवाहा महासभा आगरा मनोज तारोलिया कुशवाहा ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद एवं मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना की।

समारोह के दौरान आयोजक पवन कुशवाहा एवं समिति के अध्यक्ष किशोर कुशवाहा ने बताया कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन समाज में व्याप्त दहेज प्रथा और शादी-विवाह में होने वाली फिजूलखर्ची को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि विवाह में होने वाले अनावश्यक खर्च को बच्चों की शिक्षा एवं उनके उज्जवल भविष्य के लिए उपयोग किया जा सकता है।

समिति द्वारा सभी नवविवाहित जोड़ों को घरेलू उपयोग के आवश्यक सामान जैसे बेड, ड्रेसिंग टेबल, एलईडी टीवी, बक्सा, पंखा, मेज-कुर्सी एवं स्टील के बर्तन भेंट किए गए, ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत सुगमता से कर सकें।

इस अवसर पर दिनेश कुशवाहा बीडीसी, नरसिंह पाल, राम सिंह, गिरीश कुमार, भूरी सिंह कुशवाहा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

 

सामूहिक विवाह जैसे आयोजन न केवल सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हैं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए एक नई उम्मीद और सम्मानजनक शुरुआत का माध्यम भी बनते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!