जीवन में अभिमान का त्याग करें, तभी मिलेगी प्रभु कृपा : आचार्य दुर्गेश पाठक

जीवन में अभिमान का त्याग करें, तभी मिलेगी प्रभु कृपा : आचार्य दुर्गेश पाठक
आंवलखेड़ा। प्राचीन शिव मंदिर, आंवलखेड़ा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर कथा व्यास आचार्य दुर्गेश पाठक ने गोपी विरह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति का गूढ़ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महारास केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण, विनम्रता और अहंकार त्याग की प्रेरणा देने वाला दिव्य संदेश है।
आचार्य दुर्गेश पाठक ने कहा कि मनुष्य जब तक अभिमान का त्याग कर विनम्रता को जीवन में नहीं अपनाता, तब तक सच्ची भक्ति और भगवान की कृपा प्राप्त नहीं हो सकती। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेम, सेवा और समर्पण के भाव के साथ जीवन जीने का आह्वान किया।
कथा में परीक्षित विनोद कुमार चौहान एवं सुनीता देवी, रामवीर सिंह चौहान, सत्येंद्र सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख जगवीर सिंह तोमर, डॉ. महेश चौधरी, नारायण माहेश्वरी, पंडित प्रमोद कुमार, नेत्रपाल शर्मा, संजीव महेश्वरी, राकेश फौजी, सत्यवीर सिंह, विमणी, पूजा, कृष्णा, काव्या सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




